andhere chaaron taraf saayein saayein karne lage | अंधेरे चारों तरफ़ साएँ साएँ करने लगे

  - Rahat Indori

अंधेरे चारों तरफ़ साएँ साएँ करने लगे
चराग़ हाथ उठा कर दुआएँ करने लगे

तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर
ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे

लहू-लुहान पड़ा था ज़मीं पर इक सूरज
परिंदे अपने परों से हवाएँ करने लगे

ज़मीं पर आ गए आँखों से टूट कर आँसू
बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे

झुलस रहे हैं यहाँ छाँव बाँटने वाले
वो धूप है कि शजर इल्तिजाएँ करने लगे

अजीब रंग था मज्लिस का ख़ूब महफ़िल थी
सफ़ेद पोश उठे काएँ काएँ करने लगे

  - Rahat Indori

Jashn Shayari

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