तीरगी फिर से बढ़ा दी जाएगी
जब चराग़ों को हवा दी जाएगी
फूल तन्हा बाग़ में रह जाएँगे
एक दिन ख़ुशबू उड़ा दी जाएगी
ज़िंदा लोगों से फ़क़त नफ़रत करें
जब मरेंगे तब दुआ दी जाएगी
रोज़ बाज़ारों में मत जाया करो
वर्ना फिर क़ीमत घटा दी जाएगी
फिर तक़ाज़े पर उतर आई ज़बान
फिर मगर सूली चढ़ा दी जाएगी
इतना मत सोचा करो अपने लिए
ख़ाक ही तो है उड़ा दी जाएगी
साहिलों के ख़ौफ़ से कश्ती मिरी
बहते दरिया में डुबा दी जाएगी
— ARahman Ansari















