आख़िर तो डूबना ही था काग़ज़ की नाव को
इल्ज़ाम देते रहिए नदी के बहाव को
दिल के धुऐं को आँखों में आने नहीं दिया
आसाँ नहीं था साधना इस रख-रखाव को
बन आई जाँ पे जब पड़ा सामान बाँधना
मंज़िल समझ के बैठ गए थे पड़ाव को
— Rajesh Reddy
इल्ज़ाम देते रहिए नदी के बहाव को
दिल के धुऐं को आँखों में आने नहीं दिया
आसाँ नहीं था साधना इस रख-रखाव को
बन आई जाँ पे जब पड़ा सामान बाँधना
मंज़िल समझ के बैठ गए थे पड़ाव को
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