ये जो पूरी मोहब्बत भी नहीं है
क़ज़ा है ये अज़िय्यत भी नहीं है
हमें रोना है पर हम ठहरे लड़के
हमें तो ये सहूलत भी नहीं है
ज़रा हम दोनों की तस्वीर तो देख
अब अपने बीच क़ुर्बत भी नहीं है
मैं काफ़िर हूँ यहीं जी ले मेरे साथ
मेरे हिस्से में जन्नत भी नहीं है
मुआ'फ़ी और दग़ा-बाज़ी पे दे दूँ
ये इतनी छोटी हरकत भी नहीं है
— Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'















