तेरी बाँहों का जब से सहारा मिला
प्रेम कश्ती को मेरी किनारा मिला
टूटे घर को मेरे जब खँगाला गया
मलबे में फिर दबा ख़त तुम्हारा मिला
तेरे आने की मुझ को यूँ आहट मिली
प्राण सूखे गुलों को दुबारा मिला
जो ये कहते थे हम से नहीं राब्ता
नाम लब पे उन्हीं के हमारा मिला
तुम से पहले तो जीना मेरा व्यर्थ था
तुम मिले जीने का फिर इशारा मिला
रात दिन जो बरसते थे बरसात से
भीगे नैनों को फिर से नज़ारा मिला
दिल मेरा ले के तुम तो मुनाफ़े में हो
प्यार में तो मलक को ख़सारा मिला
— Ram Singar Malak















