नज़्म: उस की याद
मेरा कमरा उस की याद दिलाता है
वो जब भी आती है पहले गले लगाती है
मैं बस उस का इंतिज़ार करता हूँ
वो है कि इतनी दूर से आती है
मैं बस उस को देखता रहता हूँ
वो मुझ को सब कुछ समझाती है
मैं बस उस की हाँ में हाँ मिलाता हूँ
वो मुझ को सब कुछ बताती है
मैं तो बस उस को छूना चाहता हूँ
वो मुझ को बोसा देकर जाती है
मैं तो बस उस को जाते हुए देखता हूँ
वो है कि उसे तो जाना भी होता है
मैं हूँ कि मैं कुछ नहीं करता हूँ
वो है कि उसे सब कुछ करना होता है
मुझे तो बस नाराज़ होना होता है
उसे तो रिश्ता भी बचाना होता है
मेरा कमरा उस की याद दिलाता है
वो जब भी आती है पहले गले लगाती है















