किसी अजीब सी वहशत से साँस खींचते हैं
हम ऐसे लोग मशक़्क़त से साँस खींचते हैं
वो जिन दिनों में मुहब्बत से हाथ खींचता है
हम उन दिनों में सहूलत से साँस खींचते हैं
उन्हें ये खुल के बताओ तुम्हारी कौन हूँ मैं
तुम्हें जो देख के हसरत से साँस खींचते हैं
कभी ये सारे परिंदे थे आँधियों के ख़िलाफ़
और अब हवा की इजाज़त से साँस खींचते हैं
गए दिनों के तिलस्मी किवाड़ मत खोलो
हम इस हवा में अज़िय्यत से साँस खींचते हैं
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