हसीं है फूल सी नाज़ुक कली जैसी
मेरी बेटी दु'आओं की नदी जैसी
जतन से प्यार से ऐ बाग़बां रखना
ख़ुदा का नूर है ये है परी जैसी
बसा लो आँख में मोती सरीखा तुम
पलों की ज़िन्दगी में है सदी जैसी
चहक उट्ठे ये मन-आंगन परिंदे सा
फ़ज़ा में गूंजती है बाँसुरी जैसी
कभी ग़म का बियाबां हो न घबराना
ग़मों के दरमियाँ ये है ख़ुशी जैसी
— Saarthi Baidyanath















