"तस्वीर"
उदासी इंतिहाई जब भी करती है
मिरी तकलीफ़ मुझ से वा'दा करती है
तिरे हर दुख को अपना दुख ही समझूँगी
तुझे कोई नहीं समझा मैं समझूँगी
कभी जब सोचता हूँ दूर जाने का
तिरी आवाज़ मेरा पीछा करती है
नहीं होता है जब कोई भी कमरे में
तिरी तस्वीर मुझ से बात करती है
मिरा ये वहम है या फिर है सच्चाई
अकेली पड़ चुकी है दोस्त तन्हाई
मिरे कमरे का है जो हाल क्या जानो
उदासी मस्त है ख़ुशहाल क्या जानो
घड़ी तक रात भर ख़ामोश रहती है
तिरी तस्वीर मुझ से बात करती है
मिरी हालत पे तुम चाहो तरस खाओ
मुझे चाहो तो दिखलाओ न दिखलाओ
मुझे समझो नहीं समझो मगर उस को
कभी जा कर तो कोई यार समझाओ
मिरे अंदर किसी ने कर लिया है घर
मिरे अंदर हो जितने सब निकल आओ
दवा भी अब मुझे बीमार करती है
तिरी तस्वीर मुझ से बात करती है
जिसे सब नींद कहते हैं नहीं आती
तुझे भी याद अब मेरी नहीं आती
बिना बादल के जब बरसात गिरती है
तिरी तस्वीर मुझ से बात करती है
भला मैं क्यूँ तुझे हर बात बतलाऊँ
ज़रूरी तो नहीं हर चीज़ दिखलाऊँ
अगर वो बे-वफ़ा भी है तो होने दो
मुहब्बत है किसी से तो भी होने दो
किसी के साथ गर ख़ुश है तो रहने दो
अगर सब बात हैं उस की तो रहने दो
नया ये घर नई दुनिया मुबारक हो
नया जोड़ा नया लड़का मुबारक हो
तुझे हाथों की मेहँदी भी मुबारक हो
तुझे सिंदूर माथे का मुबारक हो
मिरी क़िस्मत मिरा गर साथ दे देती
मुझे दुनिया ये कहती फिर मुबारक हो
मिरी ख़ामोशियों पर आज मत जाना
बहुत ख़ुश हूँ तुझे शादी मुबारक हो
निशानी का करूँ मैं क्या जला डालूँ
तिरी तस्वीर को मैं क्या जला डालूँ
मगर मजबूर मैं ये कर नहीं सकता
तुझे ख़ुद से ज़ुदा मैं कर नहीं सकता
मिरी सब कोशिशें नाकाम रहती हैं
मुझे बातें तिरी बस याद रहती हैं
मिरी हर साँस जब एहसान करती है
तिरी तस्वीर मुझ से बात करती है
तुझे मैं याद करता हूँ मिरी ग़लती
मैं अब भी प्यार करता हूँ मिरी ग़लती
चलो सारी निशानी मैं मिटा दूँगा
तिरी तस्वीर को भी मैं जला दूँगा
मिरे ग़ुस्से से सब कुछ ख़त्म कर डाला
मुझे मुजरिम मुझे पागल बना डाला
गया वो मर तू जिस से प्यार करती थी
तिरी तस्वीर मुझ से बात करती थी















