'इश्क़ का जाम पिला दे मुझको
और बीमार बना दे मुझको
ख़ुशनुमा रंग ये दिलकश बातें
तेरी आदत न लगा दे मुझको
अपनी उल्फ़त से बचा ले या फिर
अपनी नफ़रत से मिटा दे मुझको
कोई इल्ज़ाम लगाकर मुझ पर
अपने हाथों से सज़ा दे मुझको
तेरा हर फ़ैसला सर आँखों पर
ज़हर दे या कि दवा दे मुझको
सारी दुनिया से अलग हो जाऊँ
ख़्वाब इतने न दिखा दे मुझको
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by SALIM RAZA REWA
our suggestion based on SALIM RAZA REWA
As you were reading I love you Shayari Shayari