हौसले के सामने तक़दीर भी झुक जाएगी तू बदल सकता है क़िस्मत किसलिए मजबूर हैआदमी की चाह हो तो खिलते हैं पत्थर में फूलकौन सी मंज़िल भला जो आदमी से दूर है— SALIM RAZA REWA