सारे ख़्वाबों को तोड़ आया हूँ
उस की दुनिया मैं छोड़ आया हूँ
जो ज़रूरत पे काम आनी थी
वो निशानी ही छोड़ आया हूँ
जो मुझे बोलने नहीं देती
उस के मैं कान मोड़ आया हूँ
अजनबी रास्तों पे आज 'समर'
ख़ुद को तन्हा ही छोड़ आया हूँ
— salman khan "samar"
उस की दुनिया मैं छोड़ आया हूँ
जो ज़रूरत पे काम आनी थी
वो निशानी ही छोड़ आया हूँ
जो मुझे बोलने नहीं देती
उस के मैं कान मोड़ आया हूँ
अजनबी रास्तों पे आज 'समर'
ख़ुद को तन्हा ही छोड़ आया हूँ
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