मुझ सेे कभी मिलना सनम
मिस यूँ बहुत सारा सनम
मिस यूँ टू कह दो आप भी
छोड़ो यूँ शर्माना सनम
उफ़ ये खुली ज़ुल्फ़ें तिरी
अब बाँध लो गजरा सनम
मुझ से ख़फ़ा हो आज क्यूँ
आख़िर हुआ है क्या सनम
मजनूँ बना कर अब मुझे
तुम भी बनो लैला सनम
फिर तुम लगोगी इक दुल्हन
पहनो नया जोड़ा सनम
जो है मोहब्बत आप की
कल तक हमारा था सनम
धोका दिया तुम ने मुझे
फिर मार भी डाला सनम
मिलना न हो मुमकिन अगर
तुम ख़्वाब में आना सनम
लड़का तो अच्छा है शफ़क़
फिर भी नहीं मिलता सनम
— Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"















