गीली आँखों में भी याँ इक सहरा होता है
ख़ामोशी का शोर बहुत ही गहरा होता है
आँख मिलाना महफ़िल में आसान नहीं होता
आँखों पर आँखों का पुख़्ता पहरा होता है
गिर आता है हल्की सी ही याद से वो नीचे
पलकों पर जो भी आसूँ याँ ठहरा होता है
बूढ़ी आँखें देती हैं ख़्वाबों की तस्दीक़ी
कच्ची आँख में तो हर ख़्वाब सुनहरा होता है
शोर तले नोटों के दब जाती हैं आवाज़ें
कौन भला कानून से ज़्यादा बहरा होता है
— Sandeep dabral 'sendy'















