आना जाना नहीं कि कम कर लें
ग़म बहाना नहीं कि कम कर लें
ज़ीस्त कटती है रोज़ क़तरों में
ये फ़साना नहीं कि कम कर लें
ये मोहब्बत ही सब मुसीबत थी
वो भी माना नहीं कि कम कर लें
तेरी गलियाँ तवाफ़ बेजा सही
फिर बुलाना नहीं कि कम कर लें
कैफ़ लज़्ज़त में सब मनाज़िर हैं
इतने दाना नहीं कि कम कर लें
— Sarul















