ye dekhna hai kaun bachaane ki taraf hai | ये देखना है कौन बचाने की तरफ़ है

  - Sarul

ये देखना है कौन बचाने की तरफ़ है
पानी तो अभी आग लगाने की तरफ़ है

ख़ुद अपनी ख़िलाफ़त में रहा जिसकी तरफ़ मैं
उस शख़्स को देखें कि ज़माने की तरफ़ है

इस नश्शे में आया था चला तेरी तरफ़ मैं
अब ध्यान मेरा लौट के जाने की तरफ़ है

लिपटी रही हर ख़्वाब से इक सर्द हक़ीक़त
दरिया तो अभी कश्ती डुबाने की तरफ़ है

मैं कहता रहा दिल तेरा मुझ सेे न लगे पर
और सबको लगा दिल तुझे पाने की तरफ़ है

यारों की ये ज़िद है मुझे तरतीब से रखना
और अपना अमल ख़ाक उड़ाने की तरफ़ है

  - Sarul

Deedar Shayari

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