ज़िन्दगी ख़ुशियाँ पराई ढूँढती है
सब दुखों से ही रिहाई ढूँढती है
इस दफ़ा भी हाथ आई बदनसीबी
एक राखी को कलाई ढूँढती है
ढूँढ़ता है एक भाई एक बहना
एक बहना एक भाई ढूँढती है
— Sarvjeet Singh
सब दुखों से ही रिहाई ढूँढती है
इस दफ़ा भी हाथ आई बदनसीबी
एक राखी को कलाई ढूँढती है
ढूँढ़ता है एक भाई एक बहना
एक बहना एक भाई ढूँढती है
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