तेरे एहसास को ख़ुशबू बनाते
जो बस चलता तुझे उर्दू बनाते
यक़ीनन इस से तो बेहतर ही होती
वो इक दुनिया जो मैं और तू बनाते
मिटाने की कभी नौबत न आती
जो मेरे नाम का टैटू बनाते
वो जिस में सारी दुनिया डूब जाए
तेरी फ़ुर्क़त में वो आँसू बनाते
इलाही ता-क़यामत नाचना था
सो मेरी ख़ाक से घुँघरू बनाते
किसी दिन तीरगी के कैनवस पर
तुम्हारी याद के जुगनू बनाते
— Saurabh Sharma 'sadaf'















