तमन्नाओं में उलझाया गया हूँखिलौने दे के बहलाया गया हूँदिल-ए-मुज़्तर से पूछ ऐ रौनक़-ए-बज़्ममैं ख़ुद आया नहीं लाया गया हूँ— Shad Azimabadi