आदमी आदमी का दुश्मन है
बे-सबब यकदिली का दुश्मन है
तुम नहीं हो जो मेरे साथ तो अब
हर पहर ज़िन्दगी का दुश्मन है
मिन्नतें काम नहीं आती अब
दौर ये आजज़ी का दुश्मन है
मय की मस्ती से है ग़ाफ़िल अब तक
मुत्तक़ी मैकशी का दुश्मन है
और दुश्मन वो किसी शय का नहीं
बस तेरी पैरवी का दुश्मन है
गुल से उड़ती हुई तितली ने कहा
ये चमन नाज़ुकी का दुश्मन है
काम करता ही नहीं जाम के अब
होश ये बेख़ुदी का दुश्मन है
— Shadan Ahsan Marehrvi















