hai kya zaroori mera aisa karna | है क्या ज़रूरी मिरा ऐसा करना

  - Shahanwaz Ansari

है क्या ज़रूरी मिरा ऐसा करना
सब भूल कर बस तुझे सोचा करना

  - Shahanwaz Ansari

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As you were reading Shayari by Shahanwaz Ansari

    तुम अगर मेरे हो गए होते
    तो मेरे पास क्या नहीं होता
    Shahanwaz Ansari
    उन को ही अपने दिल में बसाए हुए हैं
    जिनकी आँखों के हम ठुकराए हुए हैं

    तू नज़र तो डाल कभी उन पर भी सितमगर
    वो तग़ाफ़ुल से जो लोग सताए हुए हैं

    अब ऐसे ही कटती है हयात ये अपनी
    आँखों में तेरे ख़्वाब सजाए हुए हैं

    दिखते हैं सितारों के जैसे ये ज़मीं पर
    जो दिये तेरे हाथों के जलाए हुए हैं
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    Shahanwaz Ansari
    रौशनी से वास्ता क्या मेरा
    तीरगी ही है नसीबा मेरा

    तू नहीं था मेरी क़िस्मत शायद
    फिर भला कैसे तू होता मेरा
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    Shahanwaz Ansari
    हर दफ़ा दिल ये तुम पे वार आए
    तुम नज़र मुझको जितनी बार आए

    आओ जब तक न तुम अयादत को
    कैसे बीमार को क़रार आए

    दिन तुम्हारे ख़याल में गुज़रा
    आज तुम याद बेशुमार आए

    चंद लम्हे मिले थे साथ उसके
    वक़्त बातों में हम गुज़ार आए
    Read Full
    Shahanwaz Ansari
    इक तू ही वजह है हम जो नहीं हिजरत करते
    ये बहाना है कि गुज़ारा यहाँ बचपन अपना
    Shahanwaz Ansari

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