बस्ती छोड़ के जाने वाले अच्छे लगते हैं
कुछ लोगों को कुंडी ताले अच्छे लगते हैं
आम रविश से हटकर चलने वाले ज़िंदाबाद
उल्टे हाथ से लिखने वाले अच्छे लगते हैं
मेरे पाँव नहीं पड़ते ऊँची दूकानों पर
मुझ को रेड़ी पटरी वाले अच्छे लगते हैं
— Shakeel Jamali
कुछ लोगों को कुंडी ताले अच्छे लगते हैं
आम रविश से हटकर चलने वाले ज़िंदाबाद
उल्टे हाथ से लिखने वाले अच्छे लगते हैं
मेरे पाँव नहीं पड़ते ऊँची दूकानों पर
मुझ को रेड़ी पटरी वाले अच्छे लगते हैं
Other ghazal from the same pen
Shers of shehar.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling