ehsaan kar rahe ho inaayat hai aapki | एहसान कर रहे हो इनायत है आपकी

  - shampa andaliib

एहसान कर रहे हो इनायत है आपकी
ज़ख़्मों को भर रहे हो इनायत है आपकी

ता-उम्र इंतिज़ार में बैठे रहे मगर
अब हम पे मर रहे हो इनायत है आपकी

कुछ दिन हमारे नाम से नफ़रत थी और अब
अधरों पे धर रहे हो इनायत है आपकी

दुनिया में हम अकेले हैं ये जानते हुए
मायूस कर रहे हो इनायत है आपकी

वैसे ये आँख ख़ाली थी जिन में हुज़ूर आप
अश्कों को भर रहे हो इनायत है आपकी

इस दिन के इंतिज़ार में सदियाँ गुज़र गईं
दिल में उतर रहे हो इनायत है आपकी

  - shampa andaliib

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