एहसान कर रहे हो इनायत है आपकी
ज़ख़्मों को भर रहे हो इनायत है आपकी
ता-उम्र इंतिज़ार में बैठे रहे मगर
अब हम पे मर रहे हो इनायत है आपकी
कुछ दिन हमारे नाम से नफ़रत थी और अब
अधरों पे धर रहे हो इनायत है आपकी
दुनिया में हम अकेले हैं ये जानते हुए
मायूस कर रहे हो इनायत है आपकी
वैसे ये आँख ख़ाली थी जिन में हुज़ूर आप
अश्कों को भर रहे हो इनायत है आपकी
इस दिन के इंतिज़ार में सदियाँ गुज़र गईं
दिल में उतर रहे हो इनायत है आपकी
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