कोई कबूतर तुम्हारे ख़त को कुतर रहा है
ये हिज्र हमपे जवाल बन के उतर रहा है
मिली है किस को हमारे हिस्से की ये मोहब्बत
है कौन वो जो तुम्हारी ख़ातिर सुधर रहा है
वो एक लड़की हमारी बाहों में सो रही है
ये वक़्त पिछले दिनों से अच्छा गुज़र रहा है
वो ऊँचे लहजे में कर रही है सभी से बातें
किसी का ग़ुस्सा किसी के सर पे उतर रहा है
— Shamsul Hasan ShamS















