khamoshi bas khamoshi thi ijaazat ab hui hai | ख़मोशी बस ख़मोशी थी इजाज़त अब हुई है

  - Shariq Kaifi

ख़मोशी बस ख़मोशी थी इजाज़त अब हुई है
इशारों को तिरे पढ़ने की जुरअत अब हुई है

अजब लहजे में करते थे दर-ओ-दीवार बातें
मिरे घर को भी शायद मेरी आदत अब हुई है

गुमाँ हूँ या हक़ीक़त सोचने का वक़्त कब तक
ये हो कर भी न होने की मुसीबत अब हुई है

अचानक हड़बड़ा कर नींद से मैं जाग उट्ठा हूँ
पुराना वाक़िआ' है जिस पे हैरत अब हुई है

यही कमरा था जिस में चैन से हम जी रहे थे
ये तन्हाई तो इतनी बे-मुरव्वत अब हुई है

बिछड़ना है हमें इक दिन ये दोनों जानते थे
फ़क़त हम को जुदा होने की फ़ुर्सत अब हुई है

अजब था मसअला अपना अजब शर्मिंदगी थी
ख़फ़ा जिस रात पर थे वो शरारत अब हुई है

मोहब्बत को तिरी कब से लिए बैठे थे दिल में
मगर इस बात को कहने की हिम्मत अब हुई है

  - Shariq Kaifi

Good night Shayari

Our suggestion based on your choice

    सारी रात लगाकर उसपर नज़्म लिखी
    और उसने बस अच्छा लिखकर भेजा है
    Zahid Bashir
    68 Likes
    जब चली ठंडी हवा बच्चा ठिठुर कर रह गया
    माँ ने अपने ला'ल की तख़्ती जला दी रात को
    Sibt Ali Saba
    23 Likes
    रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत
    दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से
    Amit Sharma Meet
    24 Likes
    थोड़ा सा अक्स चाँद के पैकर में डाल दे
    तू आ के जान रात के मंज़र में डाल दे
    Kaif Bhopali
    26 Likes
    क्या बैठ जाएँ आन के नज़दीक आप के
    बस रात काटनी है हमें आग ताप के

    कहिए तो आप को भी पहन कर मैं देख लूँ
    मा'शूक़ यूँ तो हैं ही नहीं मेरी नाप के
    Read Full
    Farhat Ehsaas
    44 Likes
    उस के ख़त रात भर यूँ पढ़ता हूँ
    जैसे कल इम्तिहान हो मेरा
    Zubair Ali Tabish
    56 Likes
    सखी को हमारी नज़र लग न जाए
    उसे ख़्वाब में रात भर देखते हैं
    Sahil Verma
    25 Likes
    सुतून-ए-दार पे रखते चलो सरों के चराग़
    जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले
    Majrooh Sultanpuri
    19 Likes
    हिज्र में अब वो रात हुई है जिसमें मुझको ख़्वाबों में
    रेल की पटरी, चाकू, रस्सी, बहती नदियाँ दिखती हैं
    Dipendra Singh 'Raaz'
    किताबें, रिसाले न अख़बार पढ़ना
    मगर दिल को हर रात इक बार पढ़ना
    Bashir Badr
    52 Likes

More by Shariq Kaifi

As you were reading Shayari by Shariq Kaifi

    तेरी बातों में यूँ भी आ गया मैं
    भटकने का बहुत दिल कर रहा था
    Shariq Kaifi
    28 Likes
    जाइए अब घर पे जा के रोइए
    आपके बस का तमाशा भी नहीं
    Shariq Kaifi
    42 Likes
    रोज़ का इक मश्ग़ला कुछ देर का
    उस गली का रास्ता कुछ देर का

    बात क्या बढ़ती कि जब मा’लूम था
    साथ है कुछ दूर का कुछ देर का

    उ’म्‍र भर को एक कर जाता हमें
    हौसला तेरा मिरा कुछ देर का

    फिर मुझे दुनिया में शामिल कर गया
    ख़ुद से मेरा वास्ता कुछ देर का

    अब नहीं तो कल ये रिश्ता टूटता
    फ़र्क़ क्या पड़ता भला कुछ देर का
    Read Full
    Shariq Kaifi
    रात बे-पर्दा सी लगती है मुझे
    ख़ौफ़ ने ऐसी नज़र दी है मुझे

    आह इस मासूम को कैसे बताऊँ
    क्यूँ उसे खोने की जल्दी है मुझे

    जोश में हैं इस क़दर तीमारदार
    ठीक होते शर्म आती है मुझे

    इक लतीफ़ा जो समझ में भी न आए
    उस पे हँसना क्यूँ ज़रूरी है मुझे

    मुंतशिर होने लगे सारे ख़याल
    नींद बस आने ही वाली है मुझे

    अब जुनूँ कम होने वाला है मिरा
    ख़ैर इतनी तो तसल्ली है मुझे

    लाख मद्धम हो तिरी चाहत की लौ
    रौशनी उतनी ही काफ़ी है मुझे

    गर्द है बारूद की सर में तो क्या
    मौत इक अफ़्वाह लगती है मुझे
    Read Full
    Shariq Kaifi
    अच्छे हो कर लौट गए सब घर लेकिन
    मौत का चेहरा याद रहा बीमारों को
    Shariq Kaifi
    44 Likes

Similar Writers

our suggestion based on Shariq Kaifi

Similar Moods

As you were reading Good night Shayari Shayari