फ़िक्र करना सीख अपने आप की भी
है बुरी आदत किसी के जाप की भी
कब तलक यूँ प्यार ग़ैरों से मिलेगा
आप को अब है ज़रूरत आप की भी
हो ज़माना तेज़ लेकिन हो न इतना
काट दे जो बात बेटा बाप की भी
क्या बुरा मैं ने किया जो यूँ मिला ग़म
थैली छोटी पड़ रही है नाप की भी
क्यूँ किसी की ख़ामुशी पर हँस रहे हो
इक न इक दिन होगी बारी आप की भी
— Shivam Rathore















