अजब सा एक रिश्ता चाँद का अंबर के तारों सेकि बाग़ों का मिलन हो जैसे सावन में बहारों सेजहाँ में हाँ ज़बाँ कोई मुहब्बत की नहीं होतीबयाँ जज़्बात हो जाते हैं आँखों के इशारों से— Shivang Tiwari