साँस देकर ज़िंदगी देती घुटन भी
दूध ख़ातिर बेच देते साँप फन भी
छुट गया है हाथ ये जब से किसी से
सच कहूँ तो ज़हर लगता है मिलन भी
हो चुके है लोग सस्ते अब बहुत ही
दौर ऐसा है कि बिक जाते बदन भी
आज़मा उस को बुरे हालात में तू
आह देगी वाह वाली अंजुमन भी
जब कभी इंसाफ़ देता है ख़ुदा तो
वक़्त पर मिलता नहीं उस को कफ़न भी
— Akash Kumar















