baat achchhii burii lagii us ko | बात अच्छी बुरी लगी उस को

  - Sohil Barelvi

बात अच्छी बुरी लगी उस को
कोई दिखलाए रौशनी उस को

एक बीमार है बहुत बीमार
काश आ जाए मौत ही उस को

एक लड़की मुझे जो देवी है
क्यूँँ सताता है आदमी उस को

अपना ये जिस्म भी नहीं अपना
कौन समझाए हर घड़ी उस को

उस के होने से चल रही धड़कन
मैं ने दे दी है ज़िंदगी उस को

काम आता हूँ यार के अब भी
रास आती है शाइरी उस को

  - Sohil Barelvi

Hadsa Shayari

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