कहने लगा मज़ाक़ में हर यार बात को
हम ने ही दिल पे ले लिया इस बार बात को
कब तक दिलों के साथ करोगे शरारतें
आगे बढ़ा भी दीजिये इस बार बात को
तुम पर किसी की बात का होगा असर कहाँ
अब तुम बना चुके हो जो हथियार बात को
अब सिर्फ़ मेरे लब से निकलने लगा है सच
समझा नहीं कोई भी मगर यार बात को
ख़ामोश ही पड़ा हूँ मैं कमरे में आज कल
सुन ने लगी है ग़ौर से दीवार बात को
समझा तो हर तरह से रहा है वो चारागर
कैसे मगर समझ सके बीमार बात को
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