kehne laga mazaq men har yaar baat ko | कहने लगा मज़ाक़ में हर यार बात को

  - Sohil Barelvi

कहने लगा मज़ाक़ में हर यार बात को
हम ने ही दिल पे ले लिया इस बार बात को

कब तक दिलों के साथ करोगे शरारतें
आगे बढ़ा भी दीजिये इस बार बात को

तुम पर किसी की बात का होगा असर कहाँ
अब तुम बना चुके हो जो हथियार बात को

अब सिर्फ़ मेरे लब से निकलने लगा है सच
समझा नहीं कोई भी मगर यार बात को

ख़ामोश ही पड़ा हूँ मैं कमरे में आज कल
सुन ने लगी है ग़ौर से दीवार बात को

समझा तो हर तरह से रहा है वो चारागर
कैसे मगर समझ सके बीमार बात को

  - Sohil Barelvi

Bhai Shayari

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