कोई झगड़ा अब न होगा यार से
प्यार की बातें करेंगे प्यार से
मुश्किलों से मुश्किलों को हल किया
ख़ार को मैं ने निकाला ख़ार से
आज़माती हैं कभी तो कश्तियाँ
पार सब होते नहीं पतवार से
अपनी धुन में इक परिंदा कह गया
ला दे इक जंगल मुझे बाज़ार से
आज फिर कुछ लोग मुझ को याद आए
आज फिर कुछ लोग बोले प्यार से
कोई तो होगा हमारा फ़िक्र-मंद
कोई तो आवाज़ दे उस पार से
चंद साँसों के सहारे है मगर
कौन मिलने आ रहा बीमार से
सामने से अनसुना कोई करे
कोई सुनता है पस-ए-दीवार से
कौन अपना या पराया कौन है
सब नज़र आने लगे आसार से
अब हमारी क्या सुनोगे जब तुम्हें
बात करनी है किसी अग़्यार से
सब्र से कुछ काम लो सोहिल मियाँ
और भी आने हैं दिन दुश्वार से
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