'इश्क़ करना इक सज़ा है क्या करें
'इश्क़ का अपना मज़ा है क्या करें
काम अपने आ रहा है ठीक है
आदमी लेकिन बुरा है क्या करें
ज़िन्दगी भर कुछ करा तो है नहीं
और कहता फिर रहा है क्या करें
चार दिन की ज़िन्दगी है और फिर
बेबसी ही रास्ता है क्या करें
झूठ कहना तो ग़लत है यार पर
साफ़ कहना भी बुरा है क्या करें
हम जिसे थे ढूंढते ही रह गए
सामने ही वो खड़ा है क्या करें
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