डरता नहीं हूँ मैं किसी भी इम्तिहान से
दूँगा सभी जवाब मगर इत्मीनान से
लौट आती है सदा यूँ मेरे जिस्म से मेरी
जैसे कि लौट आई हो ख़ाली मकान से
उस ने लिया गुलाब मगर कुछ नहीं कहा
निकला नहीं है तीर अभी भी कमान से
लंकेश को हराया था सीता बचाई थी
बनता था घर को लौटना पुष्पक विमान से
ख़ुद का ही आसमान है काफ़ी 'तनोज' को
जलता नहीं वो और किसी की उड़ान से
— Tanoj Dadhich















