'इश्क़ में तेरे गँवा दी ये जवानी जान-ए-मन
हो गई दिलचस्प अपनी भी कहानी जान-ए-मन
प्यार दोनों से है मुझको फ़र्क़ इतना सा है बस
जान हैं ग़ज़लें नई तो हैं पुरानी जान-ए-मन
आज दरिया ने बताया राज़ गहरा ये हमें
आपसे ही उसने सीखी है रवानी जान-ए-मन
शे'र कहने का सलीक़ा देर से आया मगर
शे'र सुनना काम अपना खानदानी जान-ए-मन
मेरी दुनिया में मेरा दिल देश है जैसे मेरा
और तुम उस देश की हो राजधानी जान-ए-मन
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