ये अमल भी मगर ख़ुशी से नहीं
राब्ता अब मेरा किसी से नहीं
क्या निकालूँ अब इस के मानी मैं
दिल से निकले हो ज़िन्दगी से नहीं
क्या कहा आप ख़ुश हैं मेरे बगैर
ये उदासी मेरी कमी से नहीं
ये निशानी है जाने वाले की
छेड़खानी मेरी घड़ी से नहीं
मारते होंगे अपने सर पत्थर
घाव बनते हैं जब छुरी से नहीं
इश्क़ वाले अगर करें तो कहो
हिज्र का काम हर किसी से नहीं
— Tarique Jamal















