जख्मों ने मुझ में दरवाजे खोले हैं
मैंने वक़्त से पहले टांके खोलें हैं
बाहर आने की भी सकत नहीं हम में
तूने किस मौसम में पिंजरे खोले हैं
कौन हमारी प्यास पे डाका डाल गया
किस ने मस्कीजो के तस
में खोले हैं
यूँँं तो मुझको कितने खत मोसुल हुए
एक दो ऐसे थे जो दिल से खोलें हैं
ये मेरा पहला रमजान था उसके बगैर
मत पूछो किस मुंह से रोज़े खोलें हैं
वरना धूप का पर्वत किस से कटता था
उसने छतरी खोल के रास्ते खोले हैं
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