तुम ने तो बस दिया जलाना होता है
हम ने कितनी दूर से आना होता है
आँसू और दुआ में कोई फ़र्क नहीं
रो देना भी हाथ उठाना होता है
मेरे साथ परिंदे कुछ इंसान भी हैं
मैं ने अपने घर भी जाना होता है
तुम अब उन रस्तों पर हो तहज़ीब जहाँ
मुड़कर तकने पर जुर्माना होता है
— Tehzeeb Hafi















