so rahenge ke jaagte rahenge | सो रहेंगे के जागते रहेंगे

  - Tehzeeb Hafi

सो रहेंगे के जागते रहेंगे
हम तेरे ख्वाब देखते रहेंगे

तू कही और ही ढूंढता रहेंगा
हम कही और ही खिले रहेंगे

राहगीरों ने राह बदलनी है
पेड़ अपनी जगह खड़े रहेंगे

सभी मौसम है दस्तरस में तेरी
तूने चाहा तो हम हरे रहेंगे

लौटना कब है तूने पर तुझको
आदतन ही पुकारते रहेंगे

तुझको पाने में मसअला ये है
तुझको खोने के वस्वसे रहेंगे

तू इधर देख मुझ सेे बाते कर
यार चश्में तो फूटते रहेंगे

एक मुद्दत हुई है तुझ सेे मिले
तू तो कहता था राब्ते रहेंगे

  - Tehzeeb Hafi

Manzil Shayari

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