RAAHI
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Ghazal

इश्क़ होते होते होता है मुकम्मल एक दिन

जब नहीं होता तो हो जाते हैं पागल एक दिन

रंग काला हो गया है धूप में बैठे हुए
पर भरोसा है मिलेगा तेरा आँचल एक दिन

तुम वही हो ना जो झूला झूलते थे मेरे साथ
घर गया तो पूछ बैठा बूढ़ा पीपल एक दिन

है मिरे सब ख़्वाब झूठे मुझ को ये मालूम है
धीरे धीरे बन न जाऊँ मैं भी जंगल एक दिन

पूरी दुनिया को बग़ावत के हुनर ने घेरा है
चाहता हूँ हर गली बन जाए चम्बल एक दिन

इम्तिहाने इश्क़ में लाया था नंबर सब से कम
पर करूँगा मौत का एग्ज़ाम अव्वल एक दिन

— RAAHI

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