जिस्म हो या हो भरोसा सब बिका है
कौन मजबूरी बताता सब बिका है
दाम सबका लग रहा है एक जैसा
इक अकेला या ज़माना सब बिका है
कब तलक रोके रहूँ मैं आबरू को
कल भरी महफ़िल लुटाया सब बिका है
बन गया धंधा यहाँ सब छीनने का
है सभी का सब छिनाया सब बिका है
है ज़रा सी बात पर कोई नहीं दोस्त
हाँ बिका तू तो अलग सा सब बिका है
— RAAHI















