जीने में कोई मसअला ही नहीं
इस का मतलब है तू जिया ही नहीं
तीन चौथाई दुनिया पानी है
बस कि सहरा को कुछ मिला ही नहीं
कर्ण अर्जुन का हो गया इतिहास
एकलव्यों का कुछ हुआ ही नहीं
उस को हर सू सलाख़ें दिखती रहीं
होकर आज़ाद भी उड़ा ही नहीं
ये उजाले ये ख़ुश-मिज़ाज से लोग
जैसे कल कुछ यहाँ हुआ ही नहीं
छापने छपने की है क्या जल्दी
अभी तो हम ने कुछ लिखा ही नहीं
आप के बा'द 'अनन्त' महफ़िल में
स्थान जो रिक्त था भरा ही नहीं
— Ananth Faani















