बस इक सवाल है फिर कोई और सवाल नहीं
किसी भी बात का क्या तुम को कुछ मलाल नहीं
मेरा ज़रा सा भी कुछ उसको अब ख़याल नहीं
जिसे मैं कहता था उस शख़्स की मिसाल नहीं
तुम आए भी हो तो अब शहर में बचा क्या है
वो रंग-ओ-बू वो चमक और वो माह-ओ-साल नहीं
मैं कर रहा हूँ हक़ीक़त को ख़ुद नज़र-अंदाज़
ये मेरा ज़र्फ़ है ये आपका कमाल नहीं
हमीं वो 'इश्क़ में हारे हुए हैं लोग जिन्हें
नसीब मौत हो जाती है पर विसाल नहीं
चलो कि शहरस अब दिल ये भर गया "हैदर"
यहाँ पे सब है मगर एक हम-ख़याल नहीं
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