चंद रिश्तों में लगी आग बुझाने वाले
ख़ूबसूरत हैं ये लोगों को मिलाने वाले
रोज़ ख़्वाबों में मेरे चहरा छुपाने वाले
कौन है लोग मेरा दर्द बढ़ाने वाले
लाख़ वादे ही भले क्यूँ न किए हों लेकिन
छोड़ जाते हैं हमें छोड़ के जाने वाले
'आरज़ी दौर में आओ चलो हम भी देखें
कब तलक साथ निभाते हैं निभाने वाले
यूँँ तो आसान ही लगता है सभी को ये फ़न
टूट जाते हैं मगर सब को हसाने वाले
रूठ जाने दो जिसे रूठना हो "हैदर" अब
अब तो हम वो न रहे सब को मनाने वाले
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