tumhaara milne aanaa phir gale lag kar bikhar j | तुम्हारा मिलने आना फिर गले लग कर बिखर जाना

  - Haider Khan

तुम्हारा मिलने आना फिर गले लग कर बिखर जाना
लगा इस वक़्त के पहिए का इक पल को ठहर जाना

तुम्हारी याद की देहलीज़ पर जब भी मैं आया हूँ
हुआ महसूस इक पल में ही सदियों का गुज़र जाना

अँधेरी रात में भी झील पर बनता तुम्हारा अक्स
कुछ ऐसा था कि जैसे चांद का उस पर उतर जाना

अगर फिर इक दफ़ा तुमने किया ऐसा तो ग़म क्या है
तुम्हारी तो अदा है वादे कर कर के मुकर जाना

अभी कुछ और दिन हम पर मेहरबाँ है ग़मों की रुत
अभी कुछ और दिन लिक्खा है क़िस्मत में निखर जाना

तुम्हारे बाद अब कोई भी इस घर में न आ पाए
इसे तुम जाते जाते आज अपने ग़म से भर जाना

  - Haider Khan

Jalwa Shayari

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