jazbe hain magar 'ishq men vo baat nahin hai | जज़्बे हैं मगर 'इश्क़ में वो बात नहीं है

  - Haider Khan

जज़्बे हैं मगर 'इश्क़ में वो बात नहीं है
लगता है के ये पहली मुलाक़ात नहीं है

औरों के लिए जान भी हाज़िर है तुम्हारी
मेरे लिए इक पल की भी सौगात नहीं है

लोगों से जुदा हो मेरे दिन-रात हो लेकिन
तुम ज़ीस्त हो एसी भी कोई बात नहीं है

मैदान-ए-मोहब्बत ने तो क्या क्या नहीं छीना
इस से जो गिला है मुझे बे-बात नहीं है

लोगों के बिछड़ने पे जो होती है ये बारिश
रोते हैं वो बादल कोई बर्सात नहीं है

किस्मत से मिला करती है दौलत ये किसी को
ये दर्द जो अपनों का है ख़ैरात नहीं है

सब हार के भी जीत लिया है जो तुझे तो
ये हार मेरी मेरे लिए मात नहीं है

  - Haider Khan

Mehboob Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Haider Khan

As you were reading Shayari by Haider Khan

Similar Writers

our suggestion based on Haider Khan

Similar Moods

As you were reading Mehboob Shayari Shayari