आइए बैठिए चाय भी पीजिए
ख़ून भी पीजिए जान भी लीजिए
कीजिए ख़ूब ज़ुल्म-ओ-सितम कीजिए
फिर सियासत का अपनी मज़ा लीजिए
देखिए किस क़दर आग इस में भरी
नाम मज़हब का ले कर हवा दीजिए
हर परिंदे का पहले शजर काटिए
और फिर एक पिंजरा नया दीजिए
देखना फिर मिलेगा सुकूँ भी बड़ा
कुछ किसी की मदद तो ज़रा कीजिए
जा तुझे इश्क़ हो आप बाबा फरीद
अब किसी को न ऐसी दुआ दीजिए
और कुछ भी नहीं चाह सलमा की है
आप सब कुछ अना के सिवा दीजिए
— Salma Malik















