ज़िन्दगी का क्या भरोसा

आज सच है कल है धोखा

क़द्र कर लो फिर न कहना
फिर नहीं देगी ये मौक़ा

ये ज़ियादा कुछ नहीं है
बस हवा का एक झोंका

वक़्त बीते हर घड़ी ये
इस घड़ी को किस ने रोका

इश्क़ की है एक ख़्वाहिश
बस मिले महबूब बोसा

उस से कह दो लौट आए
वो गया जो फिर न लौटा

हार क्या है जीत क्या है
खेल सारा इक मुखौटा

बस वही सिक्का चला था
थे समझते जिस को खोटा

क्या तुम्हें 'सलमा' बताए
ज़िन्दगी बस एक मौक़ा

— Salma Malik

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