मैं उस से बात करने जा चुका था

मगर वो शख़्स आगे जा चुका था

मुझे दरिया ने फिर ऊपर बुलाया
मैं उस की हद से नीचे जा चुका था

तिरे नक़्श-ए-क़दम पर चलते चलते
मैं तुझ से कितना आगे जा चुका था

पढ़ाई ख़त्म कर के जब मैं लौटा
कोई अफ़सर उसे ले जा चुका था

वो चलने को तो राज़ी हो गई थी
मगर जब मैं अकेले जा चुका था

सदाएँ दे रहा था वो पलट कर
मगर मैं अपने रस्ते जा चुका था

मैं ख़ुद को रोक भी सकता था 'ताबिश'
कि मेरा वक़्त पीछे जा चुका था

— Tousief Tabish

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