jo kahtaa hai ki mujhko to faqat tum se mohabbat hai | जो कहता है कि मुझको तो फ़क़त तुम से मोहब्बत है

  - Umrez Ali Haider

जो कहता है कि मुझको तो फ़क़त तुम से मोहब्बत है
भरोसा उसपे मत करना फ़रेबी की ये ख़सलत है

जिसे आने की हसरत थी मिरे दिल में वफ़ा लेकर
मिरे दिल से निकलकर अब उसे जाने की उजलत है

मोहब्बत कर के तूने फिर अदावत की है इस बाबत
मुझे तुझपे तो आती शर्म, क्या तुझको भी ग़ैरत है

कटहरे में तो जाना है तुझे भी रोज़-ए-महशर कल
अदालत है यहाँ तेरा ख़ुदा का वाँ अदालत है

कि ख़ाकी जिस्म तेरी ज़िन्दगी क्या है सिवा इसके
ये जीते जी तू महफ़िल है वो मरने पे तू ख़लवत है

मेरी बोली लगाते हो कि ख़ुद के जैसा समझे हो
ख़रीदा जा नहीं सकता, मेरी अनमोल क़ीमत है

ये बद-बख़्ती उसी की है कि उसने मुझको छोड़ा है
जहन्नुम उसकी मंज़िल अब कि खोई उसने जन्नत है

  - Umrez Ali Haider

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