सब इंतजार में थे कब कोई ज़बान खुले
फिर उसके होंठ खुले और सबके कान खुले
हो चाहें जितना हसीं ख्वाब याद रहता नहीं
जब आंख दर्जनों लोगों के दरमियान खुले
बहुत सा लेंगे किराया जरा सी देंगे जगह
यहां के लोगों के दिल तंग है मकान खुले
गया वह शख्स तो नजरें उठाई लोगों ने
हवा चली तो जहाजों के बाजबान खुले
ये किसने मेज़ पे छोड़ी है होंठों की तस्वीर
ये किसने रखे हैं चीनी के मर्तबान खुले
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Umair Najmi
our suggestion based on Umair Najmi
As you were reading Environment Shayari Shayari